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दिल की पतंग उडावा मज्यो ल्याज्यो खत्री
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छोरी थारा गाल टमाटर लागे री कणया च गोरी गोरी
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Aapa Nilkanth k chala
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मारा दिल कु सर्दी लागह री गरमाई प्यार की देद
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तू सार दन रोतो डोलह घर टाइम प नहीं आव
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